भारतीय राजनीति में परिवारवाद: पिता-पुत्र, पिता-पुत्री और पति-पत्नी मुख्यमंत्री जोड़ियों की कहानी
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परिचय
भारतीय राजनीति में परिवारवाद एक प्रमुख विषय रहा है। कई राज्यों में राजनीतिक विरासत पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही है। इस ब्लॉग में हम उन मुख्यमंत्रियों की सूची और विस्तृत जानकारी देंगे जो या तो पिता-पुत्र, पिता-पुत्री या पति-पत्नी के रूप में सत्ता संभाल चुके हैं।
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| भारतीय राजनीति में परिवारवाद |
पिता-पुत्र मुख्यमंत्री जोड़ियां
(a) जम्मू-कश्मीर: शेख अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला
(b) ओडिशा: बीजू पटनायक और नवीन पटनायक
(c) उत्तर प्रदेश: मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव
(d) झारखंड: शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन
(e) महाराष्ट्र: शंकरराव चव्हाण और अशोक चव्हाण
(f) हरियाणा: देवी लाल और ओम प्रकाश चौटाला
(g) जम्मू-कश्मीर: फारूक अब्दुल्ला और उ़मर अब्दुल्ला
(h) कर्नाटक: एच डी देवेगौड़ा और एच डी कुमार स्वामी
(i) तामिल नाडू: एम करुणानिधी और एम के स्टालिन
(j) आंध्र प्रदेश: वाई. एस. राजशेखर रेड्डी और वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी
(k) कर्नाटक: एस. आर. बोम्मई और बसवराज बोम्मई
(l) मेघालय: पी. ए. संगमा और कॉनराड संगमा
(m) अरुणाचल प्रदेश: दोरजी खांडू और पेमा खांडू
पिता-पुत्री मुख्यमंत्री जोड़ियां
(a) जम्मू-कश्मीर: मुफ्ती मोहम्मद सईद और महबूबा मुफ्ती
पति-पत्नी मुख्यमंत्री जोड़ियां
(a) बिहार: लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी
निष्कर्ष
1. परिवारवाद और भारतीय राजनीति
भारतीय राजनीति में परिवारवाद कोई नई बात नहीं है। यह केवल संसद और विधानसभाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों की सत्ता में भी देखने को मिलता है। पिता के बाद पुत्र या पुत्री मुख्यमंत्री बनते रहे हैं, और कुछ मामलों में पति-पत्नी भी इस पद को संभाल चुके हैं।
2. पिता-पुत्र मुख्यमंत्री जोड़ियां
(a) जम्मू-कश्मीर: शेख अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला
| नाम | कार्यकाल | पार्टी |
|---|---|---|
| शेख अब्दुल्ला | 1948-1953, 1975-1982 | नेशनल कॉन्फ्रेंस |
| फारूक अब्दुल्ला | 1982-1984, 1986-1990, 1996-2002 | नेशनल कॉन्फ्रेंस |
शेख अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में एक प्रमुख नेता के रूप में पहचान बनाई। उनके बेटे फारूक अब्दुल्ला ने भी राजनीति में उनकी विरासत को आगे बढ़ाया।
(b) ओडिशा: बीजू पटनायक और नवीन पटनायक
| नाम | कार्यकाल | पार्टी |
|---|---|---|
| बीजू पटनायक | 1961-1963, 1990-1995 | जनता दल |
| नवीन पटनायक | 2000-वर्तमान | बीजू जनता दल |
बीजू पटनायक को ओडिशा की राजनीति का बड़ा चेहरा माना जाता है। उनके पुत्र नवीन पटनायक पिछले दो दशकों से मुख्यमंत्री पद संभाल रहे हैं।
(c) उत्तर प्रदेश: मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव
| नाम | कार्यकाल | पार्टी |
|---|---|---|
| मुलायम सिंह यादव | 1989-1991, 1993-1995, 2003-2007 | समाजवादी पार्टी |
| अखिलेश यादव | 2012-2017 | समाजवादी पार्टी |
मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी के संस्थापक थे और उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे। उनके बेटे अखिलेश यादव ने 2012 में मुख्यमंत्री पद संभाला।
(d) झारखंड: शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन
| नाम | कार्यकाल | पार्टी |
|---|---|---|
| शिबू सोरेन | 2005, 2008-2009, 2009-2010 | झारखंड मुक्ति मोर्चा |
| हेमंत सोरेन | 2013-2014, 2019-वर्तमान | झारखंड मुक्ति मोर्चा |
शिबू सोरेन झारखंड की राजनीति के बड़े नेता रहे, उनके बेटे हेमंत सोरेन ने भी उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया।
(e) जम्मू-कश्मीर: फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला
फारूक अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के प्रमुख नेता रहे हैं। उन्होंने 1982 में अपने पिता शेख अब्दुल्ला के निधन के बाद मुख्यमंत्री पद संभाला और कई बार इस पद पर रहे। उनके बेटे, उमर अब्दुल्ला, भी एक प्रमुख राजनीतिक नेता हैं, जिन्होंने 2009 से 2015 तक जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की। उमर अब्दुल्ला ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया और राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(f) कर्नाटक: एच. डी. देवेगौड़ा और एच. डी. कुमारस्वामी
एच. डी. देवेगौड़ा, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री रहे हैं। उनके पुत्र, एच. डी. कुमारस्वामी, ने भी कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में दो बार सेवा की है। पहली बार 2006-2007 में और दूसरी बार 2018-2019 में। कुमारस्वामी ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया और जनता दल (सेक्युलर) पार्टी के प्रमुख नेता बने।
(g) तमिलनाडु: एम. करुणानिधि और एम. के. स्टालिन
एम. करुणानिधि, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) पार्टी के प्रमुख नेता और तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री रहे हैं। उनके पुत्र, एम. के. स्टालिन, ने 2021 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला। स्टालिन ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया और राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(h) मेघालय: पी. ए. संगमा और कॉनराड संगमा
पी. ए. संगमा, मेघालय के मुख्यमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष रहे हैं। उनके पुत्र, कॉनराड संगमा, वर्तमान में मेघालय के मुख्यमंत्री हैं। कॉनराड ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया है और राज्य में विकास और सुशासन पर ध्यान केंद्रित किया है। उनकी जोड़ी पूर्वोत्तर भारत में पिता-पुत्र नेतृत्व का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
(i) अरुणाचल प्रदेश: दोरजी खांडू और पेमा खांडू
दोरजी खांडू, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और उन्होंने राज्य में कई विकास परियोजनाएं शुरू कीं। उनके पुत्र, पेमा खांडू, वर्तमान में राज्य के मुख्यमंत्री हैं और उन्होंने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया है। पेमा ने राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास और सुशासन पर जोर दिया है। उनकी जोड़ी पूर्वोत्तर भारत में राजनीतिक नेतृत्व की निरंतरता को दर्शाती है।
(j) कर्नाटक: एस. आर. बोम्मई और बसवराज बोम्मई
एस. आर. बोम्मई, कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे और भारतीय राजनीति में उनके नाम से प्रसिद्ध 'एस. आर. बोम्मई केस' एक महत्वपूर्ण संवैधानिक निर्णय है। उनके पुत्र, बसवराज बोम्मई, 2021 में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने। बसवराज ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया है और राज्य में विकास और सुशासन पर ध्यान केंद्रित किया है। उनकी जोड़ी कर्नाटक की राजनीति में पिता-पुत्र नेतृत्व का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
(k) आंध्र प्रदेश: वाई. एस. राजशेखर रेड्डी और वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी
वाई. एस. राजशेखर रेड्डी (वाईएसआर) ने 2004 से 2009 तक आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की।दुर्भाग्यवश, 2009 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनका निधन हो गया।
उनके पुत्र, वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी, ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया। उन्होंने 2011 में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की स्थापना की और 2019 में भारी बहुमत से आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
(l) हरियाणा: देवी लाल और ओम प्रकाश चौटाला
1. चौधरी देवी लाल
मुख्यमंत्री, हरियाणा:
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पहली बार: 28 जून 1977 से 28 जून 1979
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दूसरी बार: 17 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 1989
उप-प्रधानमंत्री, भारत:
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पहली बार: 2 दिसंबर 1989 से 10 नवंबर 1990
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दूसरी बार: 10 नवंबर 1990 से 21 जून 1991
2. ओम प्रकाश चौटाला
मुख्यमंत्री, हरियाणा:
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पहली बार (अल्पकालिक): 2 दिसंबर 1989 से 22 मई 1990
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दूसरी बार: 12 जुलाई 1990 से 17 जुलाई 1990
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तीसरी बार: 22 मार्च 1991 से 6 अप्रैल 1991
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चौथी बार (पूर्ण कार्यकाल): 24 जुलाई 1999 से 4 मार्च 2005
3. पिता-पुत्री मुख्यमंत्री जोड़ियां
(a) जम्मू-कश्मीर: मुफ्ती मोहम्मद सईद और महबूबा मुफ्ती
| नाम | कार्यकाल | पार्टी |
|---|---|---|
| मुफ्ती मोहम्मद सईद | 2002-2005, 2015-2016 | पीडीपी |
| महबूबा मुफ्ती | 2016-2018 | पीडीपी |
मुफ्ती मोहम्मद सईद ने जम्मू-कश्मीर में पीडीपी की स्थापना की। उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती भी राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं।
4. पति-पत्नी मुख्यमंत्री जोड़ियां
(a) बिहार: लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी
| नाम | कार्यकाल | पार्टी |
|---|---|---|
| लालू प्रसाद यादव | 1990-1997 | राष्ट्रीय जनता दल |
| राबड़ी देवी | 1997-2005 | राष्ट्रीय जनता दल |
जब लालू प्रसाद यादव को भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा, तब उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया। यह भारतीय राजनीति में एक अनोखा मामला था।
5. निष्कर्ष
भारतीय राजनीति में परिवारवाद एक महत्वपूर्ण पहलू है। कई बार इसे वंशवाद के रूप में देखा जाता है, तो कई बार इसे अनुभव और राजनीतिक विरासत के रूप में स्वीकार किया जाता है। भारत में कई ऐसे मुख्यमंत्री हुए हैं, जिनके परिवार के अन्य सदस्य भी सत्ता संभाल चुके हैं।
क्या यह लोकतंत्र के लिए सही है?
यह बहस का विषय है। कुछ लोगों का मानना है कि इससे योग्य लोगों को मौका नहीं मिलता, जबकि कुछ का मानना है कि राजनीतिक अनुभव के कारण ऐसे नेता बेहतर शासन कर सकते हैं।
आपका इस विषय पर क्या विचार है? कमेंट में जरूर बताएं?
